उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, के जिलाध्यक्ष ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा जारी बालवाटिका कक्षाओं के अनुसरण (Monitoring) संबंधी निर्देशों के क्रियान्वयन में बहादराबाद विकासखंड में अपनाई जा रही प्रक्रिया पर गहरी आपत्ति जताई है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि परिषद के निर्देशों में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि बालवाटिका कक्षाओं के अनुसरण का कार्य सीआरपी, बीआरपी, डाइट मेंटर, उप शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जाना है। इसके बावजूद विकासखंड बहादराबाद में इस कार्य की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापकों पर डाली जा रही है, जो न केवल निर्धारित दिशा-निर्देशों के विपरीत है बल्कि विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक व्यवस्था को भी प्रभावित करने वाला निर्णय है।
जिला अध्यक्ष अश्वनी चौहान ने बताया कि वर्तमान समय में अधिकांश शिक्षकों की बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी लगी हुई है तथा कई विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में प्रधानाध्यापकों पर अतिरिक्त प्रशासनिक कार्य थोपना पूर्णतः अव्यावहारिक और शिक्षण व्यवस्था के लिए हानिकारक है।
जिलाअध्यक्ष अश्वनी चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि विकासखंड बहादराबाद में अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण सीआरपी और बीआरपी को खंड कार्यालय में बैठाकर रखा जा रहा है तथा विद्यालयों में कार्य कराने के बजाय शिक्षकों पर आदेश थोपे जा रहे हैं, जबकि जनपद हरिद्वार के अन्य विकासखंडों में यही कार्य एनसीईआरटी के निर्देशानुसार सीआरपी और बीआरपी के माध्यम से ही कराया जा रहा है। यह दोहरी व्यवस्था शिक्षकों में असंतोष का कारण बन रही है।
संघ के अनुसार, कुछ एआरपी द्वारा अभी तक विद्यालयों का समुचित भ्रमण भी नहीं किया गया है और कार्यालय में बैठकर ही आदेश जारी किए जा रहे हैं। इससे पूर्व भी उप शिक्षा अधिकारी बहादराबाद द्वारा बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के संबंध में एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें केवल प्राथमिक शिक्षकों को ही आदेशित किया गया, जबकि समान व्यवस्था उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के लिए नहीं की गई। इसे भी शिक्षकों के साथ भेदभावपूर्ण निर्णय माना गया था।
उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने मांग की है कि बालवाटिका अनुसरण से संबंधित कार्य परिषद एवं एनसीईआरटी के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप ही सीआरपी, बीआरपी, डाइट मेंटर एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा कराया जाए, ताकि विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में इस प्रकार के नियमविरुद्ध एवं एकतरफा आदेश जारी किए जाते हैं, तो उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ उनका खुलकर विरोध करेगा तथा आंदोलन करने और मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी विकासखंड बहादराबाद के उप शिक्षा अधिकारी की होगी।













