देहरादून। पुरानी पेंशन बहाली और वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष जीतमणि पैन्यूली के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के समक्ष कर्मचारियों और शिक्षकों की प्रमुख मांगें विस्तारपूर्वक रखीं। इस दौरान राज्य मंत्री प्रताप सिंह पंवार भी मौजूद रहे।
दरअसल, 13 सितंबर को पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन उत्तराखंड के आह्वान पर देहरादून के परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास तक पेंशन महारैली और मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए थे। आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि ने संगठन के पदाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए आमंत्रित किए जाने का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में सोमवार को मुख्यमंत्री ने संगठन के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया।
टीईटी की अनिवार्यता और पुरानी पेंशन का मुद्दा उठाया
वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य रूप से 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग प्रमुखता से रखी।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक लंबे समय से पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद उन पर टीईटी की अनिवार्यता लागू किया जाना उचित नहीं है। वहीं कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को अपने सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टीईटी की बाध्यता के संबंध में जल्द समाधान का रास्ता निकालने का आश्वासन दिया। वहीं पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और इस दिशा में सहमति बनाने के लिए वार्ता आगे बढ़ाने की बात कही।
पदाधिकारियों ने जताया भरोसा
गढ़वाल मंडल अध्यक्ष विकास कुमार शर्मा ने कहा कि 13 सितंबर को आयोजित पेंशन महारैली ने यह स्पष्ट किया है कि पुरानी पेंशन शिक्षक-कर्मचारियों के लिए केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि उनके स्वाभिमान से जुड़ा मुद्दा है।
हरिद्वार जिलाध्यक्ष सुखदेव सैनी ने कहा कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उन पर अब टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन को मुख्यमंत्री के आश्वासन पर विश्वास है और हरिद्वार जनपद का प्रत्येक शिक्षक संगठन की मांगों के साथ खड़ा है।
हरिद्वार जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान ने कहा कि शिक्षकों पर टीईटी की बाध्यता थोपना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन के अभाव में कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। सरकार को शिक्षकों और कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
वहीं हरिद्वार जिला मंत्री दीपक चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता सकारात्मक रही। संगठन संवाद के माध्यम से समाधान में विश्वास रखता है, लेकिन यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
प्रतिनिधिमंडल में प्रांतीय महामंत्री मुकेश रतूड़ी, प्रांतीय कोषाध्यक्ष शांतनु शर्मा, प्रांतीय महिला विंग अध्यक्ष उर्मिला द्विवेदी, प्रदेश प्रचार-प्रसार सचिव हर्षवर्धन जमलोकी, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष विकास शर्मा, प्रांतीय अध्यक्ष होम्योपैथिक फार्मेसी एसोसिएशन प्रवेश उनियाल, महामंत्री तकनीकी कर्मचारी संगठन हीरा बल्लभ जोशी, हरिद्वार से अश्वनी चौहान, सुखदेव सैनी, दीपक चौहान और संतोष गड़ोही तथा देहरादून से हरीश गुसाईं, विनोद मल और मधु पटवाल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
अंत में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री द्वारा वार्ता के लिए समय देने और दोनों प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।






