डॉटर्स डे से पहले क्लिनिक प्लस ने माँ-बेटी के बेहद खास रिश्ते को केंद्र में रखते हुए अपनी नई भावपूर्ण फिल्म प्रस्तुत की है। फिल्म का मुख्य संदेश है—“माँ की मजबूरी नहीं, बेटी होती है माँ की मजबूती।” फिल्म में उस रिश्ते को खूबसूरती से दिखाया गया है, जिसमें माँ अपनी बेटी को मजबूत और आत्मनिर्भर बनने की सीख देती है और समय आने पर वही बेटी माँ का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है।
फिल्म की कहानी एक पुस्तक विमोचन समारोह से शुरू होती है। समारोह में एक लेखिका अपनी जिंदगी से प्रेरित कविताओं का संग्रह लेकर सामने आती है। जब उनसे उनकी लेखनी की प्रेरणा के बारे में पूछा जाता है, तो वह अपनी बेटी की ओर इशारा करती हैं। इसके बाद कहानी उनके बचपन के दिनों में लौटती है, जहां एक छोटी बच्ची अपनी मां से दो चोटियों की जगह एक चोटी बनाने की जिद करती है। इसी दृश्य के जरिए फिल्म यह संदेश देती है कि वास्तविक मजबूती केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि भीतर के आत्मविश्वास से आती है।
समय के साथ माँ और बेटी का रिश्ता भी बदलता है। बेटी अपनी माँ के उन त्यागों और भावनाओं को समझने लगती है, जिन्हें अक्सर दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जब माँ को मुश्किल वैवाहिक परिस्थितियों में समझौता करने की सलाह दी जाती है, तब बेटी उसे परिस्थितियों को नए नजरिए से देखने और खुद के लिए फैसला लेने का हौसला देती है।
फिल्म यह संदेश देती है कि मजबूती का अर्थ केवल कठिन परिस्थितियों को सहना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद को चुनना और अपने जीवन को अपनी शर्तों पर दोबारा गढ़ने का साहस भी है। अंत में कहानी वापस उसी पुस्तक विमोचन समारोह में लौटती है, जहां माँ अपनी बेटी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताती है।
हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) में ब्यूटी एंड वेलबीइंग की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हरमन ढिल्लों ने कहा कि एक माँ अपनी बेटी को मजबूत, संवेदनशील और आत्मनिर्भर बनाती है और एक दिन वही बेटी माँ का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म इसी खूबसूरत बदलाव का उत्सव है, जहां माँ द्वारा दिया गया आत्मविश्वास वापस लौटकर उसी का संबल और हौसला बनता है।
क्लिनिक प्लस ने इस कहानी को देश की 1.3 करोड़ सिंगल मदर्स को समर्पित किया है। ब्रांड के अनुसार, इन माताओं की जीवटता न केवल उनकी बेटियों का भविष्य गढ़ती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बेटी वास्तव में माँ की मजबूती बन सकती है।
यह अभियान मजबूत बेटियों को गढ़ने वाली माँओं के साथ क्लिनिक प्लस के लंबे जुड़ाव को आगे बढ़ाता है और माँ-बेटी के रिश्ते में मौजूद आपसी भरोसे, प्रेम और हौसले को सामने लाता है।






