क्वांटम विश्वविद्यालय, रुड़की के मीडिया स्टडीज़ एंड डिज़ाइन विभाग द्वारा आयोजित बोर्ड ऑफ स्टडीज़ (BoS) बैठक में देशभर के मीडिया एवं शिक्षा जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह अवसर और भी ऐतिहासिक बन गया क्योंकि इसी दिन हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने का गौरवपूर्ण उत्सव भी मनाया गया।
गौरतलब है कि 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ भारत का पहला हिन्दी समाचार पत्र था। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में विभाग ने हिन्दी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष का विशेष समारोह आयोजित कर हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली यात्रा को याद किया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार की मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष एवं बोर्ड ऑफ स्टडीज़ सदस्य प्रो. (डॉ.) गोविंद सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता की समृद्ध विरासत, वर्तमान मीडिया परिदृश्य तथा पत्रकारिता शिक्षा की बदलती चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके विचारों ने कार्यक्रम को नई दिशा प्रदान की।
बैठक में प्रो. (डॉ.) दुर्गेश त्रिपाठी ने मीडिया शिक्षा, पाठ्यक्रम विकास और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पत्रकारिता शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
वहीं नवभारत समूह के डिजिटल मीडिया प्रमुख एवं बोर्ड ऑफ स्टडीज़ सदस्य शैलेन्द्र तिवारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े और डिजिटल युग में हिन्दी पत्रकारिता की चुनौतियों, अवसरों तथा उभरते रुझानों पर अपने विचार साझा किए। बोर्ड ऑफ स्टडीज़ सदस्य एवं स्किल्स स्कूल के निदेशक विनीत कपूर ने एनीमेशन और वीएफएक्स उद्योग में बढ़ती संभावनाओं तथा रोजगारपरक कौशलों के महत्व पर प्रकाश डाला।
बैठक के दौरान पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा में नवाचार, उद्योग-अकादमिक सहयोग और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों को विश्वविद्यालय के मीडिया कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और उद्योगोन्मुखी बनाने की दिशा में अहम माना गया।
कार्यक्रम के अंत में मीडिया स्टडीज़ एंड डिज़ाइन विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक झा ने सभी अतिथियों एवं बोर्ड ऑफ स्टडीज़ सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की समन्वयक डॉ. कविता वर्मा, सहायक प्राध्यापक देवेंद्र सिंह, जसजीत सिंह, नीरज सहित विभाग के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।













