मसूरी में उत्तराखंड गढ़वाल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता के साथ कथित अभद्रता को लेकर बुधवार का माहौल गरमा गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल पर अभद्र भाषा और हाथापाई के प्रयास के आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया और सख्त कार्रवाई की मांग की। हालांकि देर शाम माफी के बाद मामला शांत हो गया।
बताया जा रहा है कि 17 मार्च को गांधी चौक परिसर में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में नगर की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में उत्तराखंड जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
कर्मचारियों के अनुसार बैठक के दौरान पेयजल और जल निकासी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा चल रही थी, तभी भाजपा मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने हस्तक्षेप करते हुए अधिशासी अभियंता के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग किया और हाथापाई का प्रयास भी किया, जिसे मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर टाल दिया।इस घटना के बाद जल संस्थान के कर्मचारियों में रोष फैल गया। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाओं से अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल गिरता है और कार्य के दौरान भय का माहौल बनता है।
घटना के विरोध में उत्तराखंड जल संस्थान कर्मचारी संघ, मसूरी के बैनर तले संध के कार्यवाहक अध्यक्ष रामचंद्र सेमवाल के नेत्त्व में कर्मचारियों ने मसूरी एसडीएम और कोतवाली कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने रजत अग्रवाल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को एक लिखित शिकायत भी सौंपी। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 2 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो 23 मार्च 2026 तक सभी कर्मचारी और अधिकारी पूर्ण कार्य बहिष्कार करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश में स्पष्ट है कि ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी के साथ अभद्रता या मारपीट करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में इस मामले में भी नियमों के तहत कार्रवाई जरूरी है।
दिनभर चले विरोध और बढ़ते दबाव के बीच देर शाम रजत अग्रवाल जल संस्थान कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने अधिशासी अभियंता अमित कुमार और अन्य कर्मचारियों से अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी। माफी के बाद कर्मचारी संघ ने आपसी सहमति से अपनी शिकायत वापस लेने और मामले को समाप्त करने का निर्णय लिया।
मामले के शांत होने के बाद शहर में स्थिति सामान्य हो गई है। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच मर्यादित व्यवहार और समन्वय की आवश्यकता को उजागर किया है













